Wednesday, November 16, 2011

पीओके में रोकना होगा चीन का हस्तक्षेप

 वॉशिंगटन। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) के गिलगित-बाल्टिस्तान में चीन की बढ़ती मौजूदगी पर अमेरिका के एक थिंक टैंक ने चेताया है। उसने कहा है कि अगर चीन के इस अवांछित हस्तक्षेप को चुनौती नहीं दी गई तो इस क्षेत्र का हश्र भी तिब्बत और पूर्वी तुर्किस्तान जैसा होगा।

इंस्टीट्यूट फॉर गिलगित-बाल्टिस्तान नामक इस थिंक टैंक का मानना है कि क्षेत्र में चीन की मौजूदगी कश्मीर मुद्दे को और जटिल बनाती है, जो आतंकियों और आईएसआई में अराजक तत्वों के लिए ऑक्सीजन की तरह है। थिंक टैंक ने इस क्षेत्र के लिए सैनिक हटाने, आत्मनिर्भरता, लोकतंत्र को बढ़ावा देने और उग्रवादी तत्वों की वापसी की सिफारिश की है।

थिंक टैंक की ओर से इन मामलों पर नजर रखने वाले सेंगे सेरिंग ने कहा, “अमेरिका को लद्दाख और गिलगित-बाल्टिस्तान के बीच व्यापार और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए भारत और पाकिस्तान को राजी करना चाहिए। इस क्षेत्र के लोगों के अधिकारों की रक्षा में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका भी बढ़नी चाहिए।”

गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासी सेरिंग का मानना है कि इस क्षेत्र में पाकिस्तान का हस्तक्षेप कम होने से यहां की मूल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही यहां उग्रवाद और अरब कबाइलियों का प्रभाव भी कम होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और चीन ने वहां के मूल निवासियों को अपने ही संसाधनों का लाभ लेने से रोक कर क्षेत्र के सामरिक और आर्थिक हितों को नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने कहा कि चीन की कंपनियों को यहां खनन करने के लाइसेंस देने के पाकिस्तान के एकतरफा फैसले ने वहां के लोगों के अपने जमीन के अधिकार को खतरे में डाल दिया है। सेरिंग ने आरोप लगाया कि आईएसआई इस क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकियों को छिपाने और जमीन मुहैया कराने के लिए कर रही है।

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