Tuesday, November 8, 2011

पाक में हिंदुओं का पक्षपात का आरोप

शुक्रवार, 9 सितंबर, 2011 को 20:33 IST तक के समाचार

हिंदु
पाकिस्तानी सरकार हिंदु बाढ़ पीड़ितों के साथ भेदभाव कर रही है.
“हम खुले आसमान के नीचे तपती हुई धूप में बैठे हैं और उसकी वजह से हमारे बच्चे बीमार हो रहे हैं.”
यह शब्द मूमल नामक एक महिला के हैं जो सिंध के दक्षिणी शहर बदीन से 40 किलीमीटर की दूरी पर स्थित एक गाँव में भारी बारिश से प्रभावित हुए क़रीब सौ से अधिक हिंदू परिवारों में से एक हैं.
दक्षिणी शहर गोलाड़ची से बदीन से जाते हुए बाईं तरफ़ एक सड़क कड़यो घहंवर की ओर जाती है जिसके दोनों ओर बारिश का पानी किसी झील की तरह लग रहा है.
सड़क पर लोग मौजूद हैं और उनकी पोशाक से लगता है कि वह किसान हैं और उनका संबंध हिंदू समुदाय से है.

श्याम लाल, बाढ़ पीड़ित

"मैं मदद केलिए ज़िला प्रशासन के पास गया था लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाए उलटा डाँट दिया और कहा कि किस से पूछ यह शिविर बनाया है."
सिंध प्रांत में पिछले दो हफ़्तों से लगातार बारिश हो रही है जिस की वजह से हज़ारों लोग प्रभावित हो गए हैं.
कड़यो घहंवर शहर में दाख़िल होते ही खुले मैदान में एक शिविर नज़र आया जिसमें कुछ तंबू लगे हुए थे और बच्चे, महिलाएँ और बूढ़े बैठे हुए थे.
उस शिविर की देखभाल श्याम लाल नामक एक युवा कर रहे थे. श्याम लाल ने बताया कि इस शिविर में सौ परिवार रह रहे हैं और दूसरे लोगों को नहीं रख सकते क्योंकि इतनी जगह नहीं है.

'कोई सुविधा नहीं'

उन्होंने शिविर में लगे तंबू की ओर इशारा करते हुए बताया कि उन्होंने यह तंबू किराए पर लिए हैं और पाँच हज़ार प्रति दिन किराया अदा करते हैं.
श्याम लाल ने कहा, “मैं मदद के लिए ज़िला प्रशासन के पास गया था लेकिन उन्होंने मदद करने के बजाए उलटा डाँट दिया और कहा कि किससे पूछकर यह शिविर बनाया है.”
उस शिविर में न तो पीने के साफ़ पानी की कोई व्यवस्था थी और और न ही शौचालय की कोई सुविधा थी. शौचालय की सुविधा न होने से तीन लोग बीमार हो गए और उनकी मौत हो गई.
शिविर में मौजूद मूमल नामक महिला ने बताया कि वह हिंदू हैं इसलिए स्थानीय राजनेता और प्रशासन उनकी कोई मदद नहीं कर रहे हैं जबकि वह मुसलमानों की सहायता कर रहे हैं.
कड़यो घहंवर में ग़ैर सरकारी संस्थाएँ भी राहत कार्य में व्यस्त हैं लेकिन स्थानी हिंदू समुदाय को उनसे भी शिकायत है कि वह भी स्थानीय प्रशासन के कहने पर काम कर रहे हैं और उनकी मदद नहीं कर रहे हैं.

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