Tuesday, November 8, 2011

पाक में हिंदू समुदाय की मुश्किलें

 मंगलवार, 1 नवंबर, 2011 को 16:46 IST तक के समाचार

धन बाई
धन बाई की 21 वर्षीय बेटी तीन साल पहले ग़ायब हो गई थी और अब तक वापस नहीं आई है.
“मैं बहुत मुश्किलों का सामना कर रही हूँ और मन करता है कि खिड़की से कूद पर अपनी जान दे दूँ.”
यह शब्द 52 वर्षीय धन बाई के हैं जो कराची के लयारी इलाक़े में एक कमरे के फ्लैट में अपनी दो बेटियों और पति के साथ रहती हैं.
धन बाई पाकिस्तान के उन सैंकड़ों हिंदू माताओं में से हैं जिन की बेटियों को मुसलमान बनाकर उनकी जबरन शादी कर दी जाती है.
तीन साल पहले धन बाई की 21 वर्षीय बेटी बानो घर से अचानक ग़ायब हो गई थी और फिर परिवार को पता चला कि वह मुसलमान बन चुकी है और उसकी शादी हो गई है.
बानो ने मैट्रिक परीक्षा पास करने के बाद एक ग़ैर सरकारी संस्था में काम करना शुरु कर दिया था और घर का ख़र्च चलाने में अपने पिता की मदद करती थी.
बानो की माता धन बाई ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “मेरी बेटी को कुछ लोग ले गए और हम उस मुक़दमे में इतने फंसे हैं कि अब घर चलाना भी मुश्किल हो गया है.”
उन्होंने बताया कि उनका जीवन बहुत मुश्किल में बीत रहा है और उन का मन करता है कि नदी में डूब जाए या फिर खिड़की से कूद कर अपनी जान दे दे.

'जबरन शादी और धर्म परिवर्तन'

"बानो ने एक दिन मुझे कहा कि अम्मी मैं नौकरी करना चाहती हूँ तो मैंने हाँ कह दी और वह अपना बोझ ख़ुद उठाने लगी. वह तो ग़रीबों की मदद करने जाती थी, क्या पता कि वह कभी वापस भी नहीं आएगी"
धन बाई, लड़की की माँ
कराची हिंदू पंचायत के मुताबिक़ हर महीने 20 से 22 ऐसे मामले सामने आते हैं जिसमें लड़कियों को मुसलमान बनाया जाता है और फिर उनकी जबरन शादी की जाती है.
धन बाई पिछले तीन सालों से अपनी बेटी की राह देख रही हैं और अदालतों के चक्कर काट रही हैं लेकिन तीन सालों के भीतर वह अपनी बेटी बानो को एक बार भी नहीं देख सकी हैं.
उन्होंने कहा, “बानो ने एक दिन मुझे कहा कि अम्मी मैं नौकरी करना चाहती हूँ तो मैंने हाँ कह दी और वह अपना बोझ ख़ुद उठाने लगी. वह तो ग़रीबों की मदद करने जाती थी, क्या पता कि वह कभी वापस भी नहीं आएगी.”
धन बाई ने कहा कि “मेरी बेटी से बात भी नहीं होती है, वो कहाँ है, वो कहीं है भी या नहीं या उसको मार दिया गया, हमें कुछ पता नहीं हैं.”
बेटी की याद ने धन बाई को बीमार कर दिया है और अपनी दो बेटियों लक्ष्मी और श्रद्धा की भी चिंता है कि कहीं वह भी घर न निकल जाएँ.
उनके पति बुधाराम लालजी का भी मन अब काम में नहीं लगता है.
बुधाराम लालजी अदालतों के चक्कर काट कर थक गए हैं और उन्होंने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा, “हम अदालतों के चक्कर काट कर थक गए हैं और हमने अदालत से कहा है कि एक बार तो हमारी बेटी को सामने लाया जाए और अगर वह ख़ुद कहे कि वह मुसलमान होकर ख़ुश है तो हम कभी भी उसके पीछे नहीं जाएंगे.”
बुधाराम लालजी एक स्थानीय कंपनी में ड्राइवर हैं और उनको इतना वेतन नहीं मिलता कि वह अपने बच्चों का पेट पाल सकें.

'बाप भी मुश्किल में'

उन्होंने कहा, “हमें कुछ पता नहीं है कि कब हमारा मुक़दमा ख़त्म होगा और कब अपनी बेटी से मुलाक़ात होगी. हम बहुत तंग हो चुके हैं और कहाँ जाएँ, मुक़दमों का सामना करें या बच्चों का पेट पालें.”
मुफ़्ती नईम
धार्मिक संगठन कहते हैं कि लड़के-लड़कियाँ ख़ुद उनके पास धर्म परिवर्तन के लिए आ रहे हैं
कराची हिंदू पंचायत के अध्यक्ष अमरनाथ ने बताया कि जबरन शादी और धर्म-परिवर्तन पाकिस्तान में हिंदू समुदाय का सबसे बड़ी समस्या है.
उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय की कम उम्र लड़कियों को घरों से निकाला जाता है और उन्हें झांसा दिया जाता है. उनकी शिकायत है कि इन मामलों में न तो सरकार मदद करती है और न ही पुलिस.
उन्होंने कहा, “आजकल इन मामलों में इस्लामी धार्मिक गुटों के लोग लिप्त हैं और इस्लामी मदरसों के छात्र भी ऐसा कर रहे हैं. शहर के बड़े मदरसे मुसलमान होने का प्रमाण पत्र जारी कर देते हैं.”
अमरनाथ ने बताया कि सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब यह मामला सामने आता है तो सब लोग ख़ुश हो जाते हैं, पड़ोसी है तो वह भी ख़ुश हो जाता है कि एक और मुसलमान हो गया.
उन्होंने कहा कि हिंदू समुदाय को घरों से निकालना और उन्हें मुसलमान करना एक योजना के तहत हो रहा है.

'मरदसे लिप्त नहीं'

कराची के एक बड़े मदरसे जामिया बिनोरिया के अध्यक्ष मुफ़्ती नईम ने बीबीसी से बातचीत करते हुए कहा कि उनके मदरसे के छात्र या धार्मिक संगठन के लोग हिंदू लड़कियों को मुसलमान बनाने में लिप्त नहीं हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले दो महीनों के भीतर उनके पास 200 से ज़्यादा लड़के और लड़कियाँ मुसलमान होने के लिए पहुंचे हैं और उनको किसी ने जबरन मुसलमान नहीं बनाया है.
उन्होंने कहा कि कोई ऐसा उदाहरण नहीं मिलता कि किसी हिंदू लड़की ने कहा हो कि उनको जबरन मुसलमान बनाया गया है बल्कि उनके माता पिता मरदसों पर आरोप लगाते हैं.
पाकिस्तान हिंदू परिषद के मुताबिक़ पाकिस्तान में हिंदूओं को जनसंख्या 70 लाख से ज़्यादा है जिसमें बड़ी संख्या सिंध प्रांत में रहती है.

No comments:

Post a Comment